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प्रशुल्क आयोग

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय

भारत सरकार

Tariff Commission
Ministry of Commerce & Industry
Government of India

 

 

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उपलब्धि

दिवा

 

 

प्रशुल्क आयोग की स्थापना सितम्बर 1997 में की गई थी। इन हाउस सहयोग उपलब्ध कराने के लिये अप्रैल 1999 में औद्योगिक लागत एवम् मूल्य ब्यूरो का आयोग में विलय किया गया था। वर्तमान प्रशुल्क आयोग इसके पूर्ववर्ती संगठनों नामतः प्रशुल्क बोर्ड, प्रशुल्क आयोग (पूर्व) औद्योगिक लागत एवम् मूल्य ब्यूरो के कार्यों के विलय और इनमें सुधार के परिणाम स्वरूप अस्तित्व में आया है।

प्रशुल्क आयोग में बहुआयामी विशेषज्ञ सम्मिलित हैं जो तकनीकी, लागत एवम् वित्तीय विश्लेषक, सांख्यिकी विद और अर्थशास्त्र से सम्बन्धित विशेषज्ञ होते हैं तथा आयोग सरकार को उचित निर्णय लेने में सहयोग के लिए अध्ययन आधारित सामग्री उपलब्ध कराता है। ये अध्ययन प्रश्नावली के माध्यम से एकत्रित वास्तविकताओं पर आधारित होते हैं जोकि अध्ययन यूनिटों का दौरा करके तथा यूनिट से एकत्रित प्राथमिक और गौण दोनों प्रकार के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित होते हैं।

आयोग की मानदण्ड संबंधी विशेषज्ञता को उचित निर्णय करने और अध्ययन किये गये उत्पाद/क्षेत्र/उद्योग/संगठन के प्रतियोगी परिप्रेक्ष्य के साथ-साथ आंकड़े/सूचना के विश्लेषण हेतु अध्ययन में इस्तेमाल किया जाता है।

प्रशुल्क आयोग अन्य बातों के साथ-साथ किसी विशेष उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की दृष्टि से विभिन्न एफ.टी.ए. के कार्यान्यवन के परिणाम स्वरूप विभिन्न उत्पादों के प्रतिलोमित शुल्क ढ़ांचे को कम करने के लिये प्रशुल्क संबंधी अनुशंसाओं के संबंध में अध्ययन का कार्य करता है। प्रशुल्क आयोग के अध्ययनों में राष्ट्रीय विनिर्माण नीति में निर्धारित विषयों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए घरेलू विनिर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।

प्रशुल्क आयोग चरणबद्ध रूप से निर्धारित समय सीमा के भीतर अध्ययन रिपोर्ट देने का प्रयास करता है ताकि अध्ययन के निष्कर्ष नीति बनाने के लिए वास्तविक और संगत बने रहें तथा समय व्यतीत हो जाने से असंगत न हो जाएं। अध्ययन को चरणबद्ध ढंग से और राज्य विशिष्ट और/ अथवा क्षेत्र/यूनिट/उत्पाद विशिष्ट के अनुसार तैयार करना सुनिश्चित किया जाता है।

प्रशुल्क आयोग इसके अधिदेश के अनुसार अध्ययन कराने वाले विभागों/कार्यालयों से कोई शुल्क प्राप्त नहीं करता है। अध्ययन पर होने वाले व्यय को औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए बजट से वहन किया जाता है तथा अध्ययन पर हुए व्यय के लिए अध्ययन करवाने वाले विभाग/कार्यालय को कोई शुल्क नहीं देना होता है।

प्रशुल्क आयोग की रिपोर्ट आयोग और अध्ययन कराने वाले मंत्रालय/विभाग के बीच गोपनीय होती है।

 भारत सरकार के  सचिव स्तर के अधिकारी सदस्य सचिव के तौर पर अध्यक्ष को सहयोग प्रदान करते हैं।

 

 

 

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