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कार्य

 

1-  सरकारी संकल्प के अनुसार

प्रशुल्क आयोग को मूल रूप से दिनांक 2 सितम्बर 1997 के संकल्प सं. 42012/1/98-IV/सीडीएन द्वारा कार्य सौंपा गया और तत्पश्चात 8 सितम्बर, 1998 को इसे संशोधित किया गया है।

उपरोक्त संकल्प के अनुसार आयोग को सौंपे गए कार्यों में से आयोग निम्नलिखित कार्य कर रहा हैः

क. सरकार द्वारा वस्तुओं और सेवाओं के संबंध में प्रशुल्क के निर्धारण और प्रशुल्क से संबंधित सभी मामलों के लिए भेजे गए अध्ययन अनुरोध पर उत्पादन, व्यापार और उपभोक्ता सहित विभिन्न क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए तथा अंतर्राष्ट्रीय वचनबद्धता को देखते हुए विशेषज्ञ निकाय के तौर पर अनुशंसाएं करना। आयोग को एक समग्र प्रशुल्क ढांचा तैयार करना चाहिए तथा प्रशुल्क के युक्तिकरण से संबंधित मामलों पर ध्यान देना चाहिए।

ख. एक बहु-विषयक दल के माध्यम से चयनित क्षेत्रों जैसे वस्त्र उद्योग, कृषि, आटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी, रसायन, इस्पात और इंजीनियरी वस्तुओं के संबंध में व्यापक प्रभाव विश्लेषण करना।

ग. विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन और सेवाओं की लागत और अन्य देशों के साथ इनकी प्रतिस्पर्धात्मकता पर तकनीकी अध्ययन करना।

घ. कीमत निर्धारण, कार्यक्षमता, सुधार और लागत में कमी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के मामले, औद्योगिक उत्पाद एवं सेवाओं सहित औद्योगिक लागत एवं मूल्य ब्यूरो के मूल कार्य

(i)                             प्रशासनिक कीमत प्रणाली के तहत वस्तुएं।

(ii)                           राज्य एकाधिकार/लोक सेवाएं।

(iii)                         सरकारी प्रापण

(iv)                         कीमत की निगरानी

(v)                           अन्य

इसके अलावा सरकार द्वारा समय-समय पर सौंपे गए अन्य कार्य करना।


 

 

2-  प्रषुल्क आयोग द्वारा 2012-13 में किए गए कार्य

उपरोक्त कार्यों के मदेनजर आयोग ने विशेषरूप से राष्ट्रीय विनिर्माण नीति की मुख्य विशेषताओं में उल्लिखित मामलों के लिए जानकारी प्रदान करने तथा घरेलू विनिर्माताओं को अंतर्राष्ट्रीय तौर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग तथा एन एम सी सी की आवश्यकताओं को 2012-13 में वरीयता क्रम में निर्धारित किया। इस अनुभव के मद्देनजर आयोग निम्नलिखित क्षेत्रों का प्रस्ताव करता हैः

(i) एक समग्र प्रशुल्क ढांचा तैयार करना तथा निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता के घरेलू विनिर्माताओं पर इसके प्रभाव का अध्ययन करने की दृष्टि से और इसके अलावा निम्नलिखित पहलुओं को शामिल करते हुए अन्य बातों के साथ-साथ प्रशुल्क के युक्तिकरण से संबंधित मामलों पर ध्यान देनाः

v गुणवत्ता नियंत्रण

v प्रौद्योगिकी अंतराल

v सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका

v विभिन्न मंत्रालयों की योजनाएं तैयार करना

v कार्यकुशलता में अंतराल का विश्लेषण करना

v परीक्षण सुविधाओं की पर्याप्तता

v मानकों की पर्याप्तता

v निम्न को बढ़ावा देने के लिए प्रापण प्रणाली में प्रावधान करना

        प्रौद्योगिकीय विकास

        उत्पादन विकास

        राष्ट्रीय विनिर्माण क्षमताएं विकसित करना

(ii)                           मुक्त व्यापार करार और घरेलू विनिर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मकता पर उनके प्रभाव की जांच करना

(iii)                         प्रौद्योगिकीय विकास/आवश्यकता पर परामर्श देना

(iv)                         सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के लिए नवीन कीमत निर्धारण

(v)                           घरेलू विनिर्माताओं की व्यापारिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की दृष्टि से उत्पादों में इन्वर्टिड शुल्क ढांचे की जांच करना।

पैरा 2 में सूचीबद्ध कार्य यद्यपि प्रशुल्क आयोग को पहले से ही सौंपे गए कार्यों में शामिल हैं जैसाकि पैरा 1 में आयोग के कार्यों का उल्लेख किया गया है।