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मानकीकरण-एक साधन

अवधारणा

1- कीमत प्रबंधन, आर्थिक सहायता/रियायत योजना आदि के संबंध में निर्णय लेने के लिए उत्पादित वस्तुओं की उचित लागत/कीमत के अनुमान की आवश्यकता होती है। उत्पादित वस्तुओं की उत्पादन लागत में उपयोग किए गए कच्चे माल की लागत, ऊर्जा जैसे विद्युत, वाष्प और अन्य उपयोगी सेवाओं, रूपांतरण लागत, पैकिंग लागत आदि की लागत शामिल है। विक्रय लागत में परिवहन और अन्य विक्रय लागत शामिल है। किसी विनिर्माण यूनिट में उत्पाद के उत्पादन के संबंध मे एक वर्ष की अवधि में वहन की गई लागत के अनुमान से उत्पादन/विक्रय की वास्तविक लागत प्राप्त होती है। चूंकि यह आवश्यक नहीं है कि विनिर्माण यूनिट में कार्यकुशलता से प्रचालन हुआ है अतः उत्पादन/विक्रय की वास्तविक लागत पर आधारित कीमत निर्धारण व्यवस्था में प्रचालन की कार्यकुशलता में सुधार पर ध्यान नहीं दिया जाता है। इस विषय में उल्लेखनीय है कि कई वर्षों के पश्चात मानक लागत/कीमत निर्धारण व्यवस्था विकसित हुई है और प्रशुल्क आयोग द्वारा इसका व्यापक उपयोग किया जा रहा है (पूर्व में औद्योगिक लागत एवं मूल्य ब्यूरो द्वारा जिसका प्रशुल्क आयोग में विलय हो गया है)।

2- मानक कीमत निर्धारण का कार्य कार्यकुशलता पैरामीटर के स्वीकार्य स्तर पर लागत के अनुमान पर आधारित है। लागत को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण पैरामीटर हैं क्षमता, क्षमता उपयोग और उत्पादन स्तर, कच्चे माल का उपभोग, ऊर्जा, आदि। विनिर्माण यूनिट के निष्पाद्य कार्यकुशुलता पैरामीटर निष्पादन के अनुमान के लिए यूनिट का विभिन्न अवधि में मूल्यांकन किया जाता है और उद्योग जगत में अन्य कार्य कुशल यूनिट के निष्पादन, अंतर्राष्ट्रीय कार्य कुशलता आदि के अनुसार बैंच मार्क का निर्धारण किया जाता है। मानक कीमत प्राप्त करने के लिए निवेश पर उचित लाभ भी शामिल किया जाता है। चूंकि मानक कीमत निर्धारण अपनाए गए कार्यकुशलता पैरामीटर पर आधारित है अतः अकुशल यूनिटों के लिए अपनी कार्यकुशलता में सुधार करना अपेक्षित होता है। इसके साथ-साथ उच्च कार्यकुशलता प्राप्त करने वाली विनिर्माण यूनिट इससे प्राप्त होने वाले लाभ को प्राप्त करेंगी। इस प्रकार मानक कीमत निर्धारण व्यवस्था उच्च कार्यकुशलता प्राप्ति को प्रोत्साहित करती है। इसमें लागत घटाने और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने पर बल दिया जाता है।

पद्धति

        मानक लागत/कीमत का अनुमान लगाने की पद्धति भौतिक इनपुट/आउटपुट मानदण्ड (तकनीकी मानदण्ड) के अनुमान से शुरू होती है। इस विषय में प्रतिष्ठापित क्षमता, उत्पादन, क्षमता उपयोग, विनिर्दिष्ट कच्चे माल का उपभोग, उपयोगिता उपभोग मानक/मशीन उत्पादकता किसी उत्पाद की उत्पादन लागत को प्रभावित करने वाले मुख्य पैरामीटर हैं। तर्कसंगत कार्यकुशलता स्तर पर उत्पादन की मानक लागत का अनुमान लगाने के लिए चयनित यूनिट/संयन्त्र के विगत 3 से 5 वर्ष की अवधि के वास्तविक निष्पादन के आधार पर उपरोक्त पैरामीटर के संबंध में तकनीकी मानदण्ड तैयार किए जाते हैं।

        उत्पादन की मानक लागत निकालने के लिए प्रत्येक चयनित यूनिट के उत्पाद के उत्पादन/विक्रय (लागत वर्ष) की वास्तविक लागत पर तकनीकी मानदण्ड को प्रयुक्त किया जाता है। उत्पादन की वास्तविक लागत में कच्चे माल की लागत, रूपांतरण लागत और पैकिंग लागत शामिल हैं। विक्रय की लागत प्राप्त करने के लिए उत्पादन लागत में परिवहन और अन्य लागत को शामिल किया जाता है। रूपांतरण लागत में विद्युत और ईंधन (उपयोगिता लागत), वेतन और मजदूरी, मरम्मत और रख-रखाव, स्टोर और कल पुर्जे, अवमूल्यन, फैक्टरी और प्रशासनिक व्यय शामिल हैं। प्रत्येक चयनित यूनिट/संयन्त्र के संबंध में उत्पादन की मानक लागत के अनुमान के लिए निम्नलिखित पैरामीटर को ध्यान में रखा जाता हैः

प्रतिष्ठापित क्षमता और क्षमता उपयोग मानदण्ड का मूल्यांकन

निष्पाद्य मानक उत्पादन का मूल्यांकन

कच्चे माल के उपभोग की मानक आवश्यकता

उपयोगिता उपभोग की मानक आवश्यकता

जनशक्ति उत्पादकता की मानक आवश्यकता

खर्च की मानक आवश्यकता

कच्चे माल और उपयोगिता की नवीनतम कीमतों, आवश्यकतानुसार रुपए की वर्तमान कीमत के आधार पर समायोजित करते हुए आयातित इनपुट की कीमत को ध्यान में रखते हुए कच्चे माल और उपयोगिता की लागत को अद्यतन करना

सामान्य वेतनवृद्धि प्रभाव के मsनजर वार्षिक वृद्धि दी जाती है जिससे वेतन और मजदूरी को अद्यतन करना

नियत और परिवर्तन लागत को ध्यान में रखते हुए रूपांतरण लागत में शामिल मरम्मत और रख-रखाव, फैक्टरी तथा प्रशासनिक खर्च को उपयुक्त रूप से समायोजित किया जाता है।

        प्रत्येक यूनिट के उत्पाद की मानक उत्पादन लागत उपरोक्त पैरामीटर को ध्यान में रखते हुए तदनुसार निकाली जाती है।

        प्रत्येक यूनिट के उत्पाद की मानक लागत का अनुमान उत्पाद की मानक लागत, नियोजित पूंजी पर ब्याज और लाभ को ध्यान में रखते हुए किया जाता हैः

  वास्तविक अचल सम्पत्ति और संचालन पूंजी के अनुसार नियोजित पूंजी पर लाभ । वास्तविक अचल सम्पत्ति में कर्ज/उधार और इक्विटी शामिल है। सामान्यतः नियोजित पूंजी पर लाभ की गणना टैक्स के पश्चात 12 प्रतिशत की दर पर की जाती है

  आवधिक ऋण और संचालन पूंजी के संबंध में अवधि के दौरान प्रचलित औसत ब्याज दर का ध्यान रखा जाता है।

          उद्योग की मानक कीमत की गणना निम्न प्रकार से की जाती हैः-

  चयनित यूनिट के उत्पाद की भारित औसत कीमत के आधार पर अथवा

  उद्योग की अकुशल यूनिट को अलग करने के पश्चात कार्यकुशल यूनिट के आधार पर

 

लाभ

  व्यक्ति और अथवा किसी समूह द्वारा उचित माना गया

  इनपुट (जनशक्ति, सामग्री, ऊर्जा और पूंजी) के आदर्श/कार्यकुशल स्तर पर वस्तुओं/सेवाओं की लागत को निर्धारित करता है और कार्यकुशलता में सुधार पर बल देता है तथा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है।

  यह भौतिक सुधार के लिए क्षेत्रों के अभिनिर्धारण में सहयोग करता है जिससे लागत को कम किया जा सकता है।

  मानक कीमत निर्धारण पद्धति एक मूलभूत प्रबंधन साधन है जोकि xq.kokk@mR"Vrkऔर नवीनता का समर्थन करता है। वास्तव में यह सर्वश्रेष्ठ प्रतियोगी की तुलना में स्वयं के कार्य निष्पादन और कार्यों के मूल्यांकन की एक सतत प्रक्रिया है। इस प्रकार यह प्रतिस्पर्धात्मकता संबंधी अध्ययन में बेंच मार्क निर्धारित करने वाला साधन है।

  मानक कीमत निर्धारण उपभोक्ता के हितों का संरक्षण करते हुए सभी स्टेकहोल्डर्स के हितों में संतुलन स्थापित करता है।

  यह एक ऐसा साधन है जोकि औद्योगिक कार्यकुशलता में सुधार के लिए आधार तैयार करने पर भी ध्यान केन्द्रित करता है।

  समयावधि व्यतीत होने के साथ यह साधन परीक्षण में सफल रहा है और उभरते जटिल वैश्विक बाज़ार परिदृश्य और गला-काट प्रतिस्पर्धा में यह अनिवार्य हो गया है।