कार्यप्रणाली

  • कार्यप्रणाली

अध्ययनों के संचालन के लिए पद्धति

प्रशुल्‍क आयोग एक ऐसा संगठन है जो मंत्रालयों/विभागों को अनुसंधान आधारित सूचनाएं प्रदान करता है जो सूचित निर्णय लेने के लिए क्षेत्र से एकत्र किए गए ज़मीनी हक़ीक़त पर डेटा / सूचना का उपयोग करके किए गए गहन अध्ययन पर आधारित होता है। प्रशुल्‍क आयोग, भारत सरकार के मंत्रालयों और विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और सहकारी समितियों / निगमों, विभिन्न समितियों और प्राधि‍करणों के हवाले से तथा उद्योग और औद्योगिक निकायों / संघों से प्राप्‍त प्रतिवेदनों के आधार पर अध्ययन करता है। अध्‍ययनों को संचालित करने की पद्धति निम्नानुसार हैं :

    बुनियादी मुद्दों की पहचान और मंत्रालयों/विभागों के परामर्श से अध्ययन के   विचारार्थ विषयों की तैयारी
  • आर्थिक, तकनीकी और लागतनिर्धारण पहलुओंको कवरकरने वाले विशिष्ट अध्ययनप्रश्नावलीको तैयार करना औरअपेक्षित डेटा / सूचना प्रस्तुतकरने के लिए इकाइयों को भेजा जाना।
  • इकाइयों से प्रश्नावली के माध्यम से मांगे गए समेकित डेटा को आंतरिक रूप से  संकलित किया जाता है।
  • अध्ययन दल द्वारा क्षेत्र के दौरों के दौरान, प्रश्नावली के जवाबों की जांच पर मूल्यांकनकिए गएकिसी भी अतिरिक्त डेटा /डेटा अंतराल / स्पष्टीकरणकोएकत्र किया जाता है।
  • स्पष्टीकरण मांगने के लिए कंपनियों / इकाइयों के अधिकारियों के साथ चर्चा / बैठक।
  • साहित्य सर्वेक्षण
    • संबंधित उद्योग संघ / प्रशासनिक मंत्रालय / परामर्शदाताओं/ शैक्षणिक संस्थानों का डेटा, विशेष रूप से अनुप्रयोज्‍य अनुसंधान / सांख्यिकीय संगठनों / विभिन्न तकनीकी, आर्थिक और लागत निर्धारण पत्रिकाओं के साथ-साथ लागत लेखा परीक्षा रिपोर्टों, विगत अध्ययन रिपोर्टें आदि  से प्राप्‍त डेटा ।  सहायक स्रोतों और  इंटरनेट के माध्यम से डेटा की व्यापक खोज और डेटा की स्कैनिंग करना एक सतत प्रक्र‍िया है।यह डेटा / सूचना को छांटने में मदद करता है और रिपोर्ट प्रस्तुत होने तकयह जारी रहने वालीप्रक्रिया है।
  • अध्ययन प्रक्रियाओंके संचालन काअनुक्रम, प्रवाह चार्ट में संक्षेप में दिया गया है
  • अध्‍ययन प्रभारी, अध्ययन समन्वयक औरआर्थिक, तकनीकी और लागतनिर्धारण प्रभागों से अध्ययन दल के सदस्योंको शामिल करते हुए अध्‍ययन दलों के गठन के आधार पर प्रशुल्‍क आयोग द्वारा अध्‍ययन किए जाते हैं।अध्‍ययनों को संचालित करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया/कार्यप्रणाली/गतिविधिऔरप्रत्येक विनिर्दिष्ट स्थिति कीजिम्मेदारी, आयोग में अपनाए गए सहभागिता दृष्टिकोण के आधार पर होती है।
  • अध्ययन के संचालन के लिए अध्ययन प्रभारी और अध्ययन समन्वयक औरअध्ययन दल के सदस्यों केकर्तव्यभी सहभागिता दृष्टिकोण पर आधारित होते हैं।

अध्ययन के लिए समय सीमा

सरकार की आवश्यकता के आधार पर अध्ययन को प्राथमिकता दी जाती है। समय सीमा, अध्ययन के संचालन के पिछले अनुभव, व्यक्तियों की औसत प्रदर्शन क्षमता और प्रशुल्‍क आयोग में उपलब्ध जनशक्ति पर आधारित होती है।

क्र.सं. अध्‍ययन समय सीमा प्रति अध्ययन कुल जनशक्ति की आवश्यकता
औसत नमूना आकार के अध्ययन के लिए अपेक्षित डेटा / सूचना के पूर्ण सेट की प्राप्ति के बाद 2-3 महीने 6-7
व्यापक नमूना आकार के  कवरेज के लिए अपेक्षित डेटा / सूचना के पूर्ण सेट की प्राप्ति के बाद 3-4 महीने 16