अध्ययन क्षेत्र और क्षमता

  • अध्ययन क्षेत्र और क्षमता

प्रशुल्‍क आयोग के अध्ययन के क्षेत्र और क्षमताएं

अध्ययन-प्रक्रिया

अध्ययन के क्षेत्र

प्रशुल्‍क आयोग स्‍वत: या विभिन्न मंत्रालयों / विभागों से संदर्भ प्राप्‍त होने पर अध्ययन करता है । शामिल किए गए अध्ययन के क्षेत्र हैं :

  • औद्योगिक नीतिगत मामले
  • संसाधन दक्षता अध्ययन- ऊर्जा, जल, सामग्री, अनुसंधान एवं विकास औरपर्यावरण
  • व्‍युत्‍क्रमित शुल्‍क संरचना जैसे मुद्दों सहित प्रशुल्‍क  संरचना को सुव्यवस्थित करने/तर्कसंगत बनाने/सामंजस्य बैठाने के लिए प्रशुल्‍क  अध्ययन।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्‍मकता पर अध्ययन
  • उपयोगिता और सेवा क्षेत्र सहित उद्योगों का मूल्य निर्धारण अध्ययन
  • विकासात्मक अध्ययन
  • उपभोक्ता उन्मुख अध्ययन
  • आदानों की लागत, प्रौद्योगिकीय सुधारों की संभावनाओं और पूंजी एवं  अन्य सामग्री संसाधनों के प्रभावी उपयोग, लागत में कमी लाने  के उपायों के संदर्भ मेंतकनीकी आर्थिक औरमानकलागत / मूल्य अध्ययन।

क्षमताऐं

पिछले तीन दशकों में विकसित अंतर-विधात्‍मक व्‍यावसायिक विशेषज्ञता के उपयोग ने प्रशुल्‍क आयोग को अद्वितीय क्षमता वाले, प्रदर्शनीय सहक्र‍िया युक्‍त एक, संयोजक, व्यापक और विश्लेषणात्मक संगठन बना दिया है:

  • सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से डेटा एकत्र करना और उसका विश्लेषण करना।
  • लागत, मूल्य, दक्षता और औद्योगिक उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्‍मकता पर  परामर्श  देना।
  • औद्योगिक उत्पादन से संबंधित मुद्दों पर ध्‍यान देने के लिए उद्योग / प्रौद्योगिकी अग्रणियों  के प्रमुखों के साथ पारदर्शिता और विश्वास के साथ बातचीत करना।
  • समग्र सरकारी नीतियों को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ क्षेत्रों से संबंधित नीतिगत मुद्दों पर परामर्श देना।
  • विवेकपूर्ण लेखांकन विधियों का उपयोग करके नियामक लागत निर्धारण के आधार पर मूल्य की गणना करना और घरेलू उद्योगों के लिए सुरक्षा स्तर का निर्धारण करने का एक बेहतर तरीका प्रदान करना ताकि वे प्रतिस्पर्धा  में विदेशी निर्माताओं का मुकाबला कर सकें।
  • तकनीकी इनपुट / आउटपुट मानदंड विकसित करना, जो दक्षता और यथार्थवाद पर आधारित होने के कारण अब तक अंतरराष्ट्रीय लागत निर्धारण  के लिए भी उपयुक्त हैं।
  • आदर्श औद्योगिक लागत और यथार्थवादी / तर्कसंगत उचित मूल्य के संबंध में औद्योगिक दक्षता, लागत में कमी और मूल्य निर्धारण के मुद्दों में सुधार का सुझाव देना।
  • उद्योग की परिचालन इकाइयों की लागत युक्तिकरण और इष्टतम दक्षता के लिए सुव्यवस्थित सुधार का सुझाव देना।